Marketing Myths That Are Killing Business Clancy Kevin J.
By: Material type:
TextLanguage: English Publication details: New York New York, McGraw-Hill, Inc. 1994Description: xxxv,308ISBN: - 0-07-011124-3
- X:51 N4
Textbook
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
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Faculty of Management Library | Faculty of Management Library | X:51 N4 (Browse shelf(Opens below)) | Available | ML1140844 |
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128851
पाश्चात्य साहित्यशास्त्र की भूमिका
by केवलिया, मदन -
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पाश्चात्य साहित्यशास्त्र की भूमिका
by केवलिया, मदन -
128853
पाश्चात्य साहित्यशास्त्र की भूमिका
by केवलिया, मदन -
128854
पाश्चात्य साहित्यालोचन और हिन्दी पर उसका प्रभाव
by वर्मा, रवीन्द्र सहाय -
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पाश्चात्य साहित्यालोचन और हिन्दी पर उसका प्रभाव
by वर्मा, रवीन्द्र सहाय -
128856
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धांत
by गुप्त, लीलाधर -
128857
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धांत
by गुप्त, लीलाधर -
128858
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धांत
by गुप्त, लीलाधर -
128859
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धांत
by गुप्त, लीलाधर -
128860
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धांत
by गुप्त, लीलाधर -
128861
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धांत
by गुप्त, लीलाधर -
128862
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धांत
by गुप्त, लीलाधर -
128863
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धांत
by गुप्त, लीलाधर -
128864
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धांत
by गुप्त, लीलाधर -
128865
पाश्चात्य साहित्यालोचन के सिद्धान्त
by गुप्त, लीलाधर -
128866
पाश्वात्य काव्य शास्त्र के सिद्धांत
by गुप्त, शांति स्वरुप -
128867
पाश्वात्य काव्य शास्त्र के सिद्धांत
by गुप्त, शांति स्वरुप -
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पा्रचीन संस्कृत वाड्.मय में राजधर्म का स्वरूप
by शर्मा, केदार -
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पा्रचीन संस्कृत वाड्.मय में राजधर्म का स्वरूप
by शर्मा, केदार -
128870
पि›ल और भारत का छन्द
by मीणा, टेकचन्द, ले. -
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पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल
by विष्णु दत्त राकेश -
128872
पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल
by विष्णु दत्त राकेश -
128873
पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल
by विष्णु दत्त राकेश -
128874
पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल
by विष्णु दत्त राकेश -
128875
पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल
by विष्णु दत्त राकेश -
128876
पुनर्नवा और लोकजीवन
by यादव, सुरेन्द्र प्रताप -
128877
पुनर्नवा चेतना और शिल्प
by राजनारायण -
128878
पुनर्नवा चेतना और शिल्प
by राजनारायण -
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पुनर्नवा चेतना और शिल्प
by राजनारायण -
128880
पुनर्नवा चेतना और शिल्प
by राजनारायण -
128881
पुनर्नवा पुनर्मूल्यांकन
by नत्थन सिंह -
128882
पुनर्मिलन
by विद्यावती 'कोकिल' -
128883
पुनर्लेखन
by पचौरी, सुधीश -
128884
पुनशिचन्तन
by रजनीश, गोविन्द -
128885
पुराख्यान और कविता
by शर्मा, लक्ष्मीनारायण -
128886
पुराख्यान और कविता
by शर्मा, लक्ष्मीनारायण -
128887
पुराख्यान और कविता
by शर्मा, लक्ष्मीनारायण -
128888
पुराख्यान और कविता
by शर्मा, लक्ष्मीनारायण -
128889
पुराख्यान और कविता
by शर्मा, लक्ष्मीनारायण -
128890
पुराख्यान और कविता
by शर्मा, लक्ष्मीनारायण -
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पुराख्यान का आधुनिक हिन्दी ग्रंथ काव्यों पा प्रभाव
by नूरजहां -
128892
पुराख्यान का आधुनिक हिन्दी ग्रंथ काव्यों पा प्रभाव
by नूरजहां -
128893
पुराण - तत्व - प्रकाश
by वैश्य, चिम्मनलाल -
128894
पुराण - परिशीलन
by चतुर्वेदी, गिरिधर शर्मा -
128895
पुराण तत्व मीमांसा
by त्रिपाठी, कृष्णामणि; पाण्डेय, राजबी, संपा. -
128896
पुराण निर्माणाधिकरणम्
by झा, मधुसूदन -
128897
पुराण परिशीलन
by चतुर्वेदी, गिरिधर शर्मा -
128898
पुराण परिशीलन
by शर्मा, गिरिधर, चतुर्वेदी -
128899
पुराण परिशीलन
by शर्मा, गिरिधर, चतुर्वेदी -
128900
पुराण परिशीलन
by शर्मा, गिरिधर, चतुर्वेदी
Marketing Myths That Are Killing Business
APA
Clancy Kevin J, . (1994). Marketing Myths That Are Killing Business. New York: New York, McGraw-Hill, Inc.
Chicago
Clancy Kevin J, . 1994. Marketing Myths That Are Killing Business. New York: New York, McGraw-Hill, Inc.
Harvard
Clancy Kevin J, . (1994). Marketing Myths That Are Killing Business. New York: New York, McGraw-Hill, Inc.
MLA
Clancy Kevin J, . Marketing Myths That Are Killing Business. New York: New York, McGraw-Hill, Inc. 1994.
