और पंछी उड़ गया
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TextLanguage: Hindi Series: एक दिशाहीन सफ़र - 3Publication details: दिल्ली राजपाल भारत 2004Description: 204पृ0 cmISBN: - 8170284775
- 9788170284772
- Aur panchhī uड़ gayā
- O152,3N12w,1, P4
Textbook
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
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Textbook
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Arts Library | Arts Library | O152,3N12w,1 P4 (Browse shelf(Opens below)) | Available | AL1346504 |
यशस्वी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा...साथ ही पूरी एक सदी के साहित्यिक जीवन तथा समाज और देश का चारों ओर दृष्टि डालता आईना और दस्तावेज़ विष्णु प्रभाकर अपने सुदीर्घ जीवन में साहित्य के अतिरिक्त सामाजिक नवोदय तथा स्वतंत्रता-संग्राम से भी पूरी अंतरंगता से जुड़े रहे-रंगमंच, रेडियो तथा दूरदर्शन सभी में वे आरंभ से ही सक्रिय रहे। शरत्चन्द्र चटर्जी के जीवन पर लिखी उनकी बहुप्रशंसित कृति 'आवारा मसीहा' की तरह यह भी अपने ढंग की विशिष्ट रचना है। यह आत्मकथा तीन खंडों में प्रकाशित है: • पंखहीन (प्रथम खंड) • मुक्त गगन में (द्वितीय खंड) • और पंछी उड़ गया (तृतीय खंड)
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