मुक्तिबोध, गजानन माधव

चांद का मुंह टेढ़ा है Chāanda kā muanha ṭeढ़ā hai - संस्क 2 - दिल्ली,भारत: भारतीय ज्ञानपीठ, 1964. - 270पृ. cm. - ज्ञानपीठ लोकोदय गं्रथमाला; 201 .

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