TY - BOOK AU - मंगलप्रज्ञा, समणी TI - व्रात्य दर्शन: जैन दर्शन निबन्धावली U1 - R693(Q3:433), 152P5 PY - 2005/// CY - नयी दिल्ली PB - आदर्श साहित्य संघ प्रकाशन ER -