विष्णु प्रभाकर

और पंछी उड़ गया Aur panchhī uड़ gayā - दिल्ली राजपाल भारत 2004 - 204पृ0 cm. - एक दिशाहीन सफ़र - 3 .

यशस्वी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा...साथ ही पूरी एक सदी के साहित्यिक जीवन तथा समाज और देश का चारों ओर दृष्टि डालता आईना और दस्तावेज़ विष्णु प्रभाकर अपने सुदीर्घ जीवन में साहित्य के अतिरिक्त सामाजिक नवोदय तथा स्वतंत्रता-संग्राम से भी पूरी अंतरंगता से जुड़े रहे-रंगमंच, रेडियो तथा दूरदर्शन सभी में वे आरंभ से ही सक्रिय रहे। शरत्चन्द्र चटर्जी के जीवन पर लिखी उनकी बहुप्रशंसित कृति 'आवारा मसीहा' की तरह यह भी अपने ढंग की विशिष्ट रचना है। यह आत्मकथा तीन खंडों में प्रकाशित है: • पंखहीन (प्रथम खंड) • मुक्त गगन में (द्वितीय खंड) • और पंछी उड़ गया (तृतीय खंड)

8170284775 9788170284772

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448, 19/03/2008, Swaraj Prakashan Textbook

O152,3N12w,1, P4