| 000 | 02444nam a2200301Ia 4500 | ||
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| 024 | _a494 | ||
| 037 | _b448, 19/03/2008, Swaraj Prakashan | ||
| 037 | _cTextbook | ||
| 040 |
_bhin _aARTS _cARTS |
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| 041 | _ahin | ||
| 082 | _aO152,3N12w,1, P4 | ||
| 100 | _aविष्णु प्रभाकर | ||
| 245 | 0 | _aऔर पंछी उड़ गया | |
| 246 | _aAur panchhī uड़ gayā | ||
| 260 |
_aदिल्ली _bराजपाल भारत _c2004 |
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| 300 |
_a204पृ0 _ccm. |
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| 490 | _aएक दिशाहीन सफ़र - 3 | ||
| 520 | _aयशस्वी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा...साथ ही पूरी एक सदी के साहित्यिक जीवन तथा समाज और देश का चारों ओर दृष्टि डालता आईना और दस्तावेज़ विष्णु प्रभाकर अपने सुदीर्घ जीवन में साहित्य के अतिरिक्त सामाजिक नवोदय तथा स्वतंत्रता-संग्राम से भी पूरी अंतरंगता से जुड़े रहे-रंगमंच, रेडियो तथा दूरदर्शन सभी में वे आरंभ से ही सक्रिय रहे। शरत्चन्द्र चटर्जी के जीवन पर लिखी उनकी बहुप्रशंसित कृति 'आवारा मसीहा' की तरह यह भी अपने ढंग की विशिष्ट रचना है। यह आत्मकथा तीन खंडों में प्रकाशित है: • पंखहीन (प्रथम खंड) • मुक्त गगन में (द्वितीय खंड) • और पंछी उड़ गया (तृतीय खंड) | ||
| 942 |
_hO152,3N12w,1, P4 _cTB _2CC |
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